बारिश तो नहीं By Tarun Kumar Soni
बारिश तो नहीं
आज मन भीगा सा लग रहा है
पर इसके पीछे बारिश तो नहीं
रोज तनहा रोता हूँ तकिये से लिपटकर
कहीं ये किसी की साजिश तो नहीं
देखना चाहता हूँ कुछ पल यूँ ही तुमको
कहीं ये दिल की ख्वाहिश तो नहीं
चाहने वाले अब भी लबों से लगाये फिरते हैं मुझको
कहीं तुम समझ बैठी, लावारिस तो नहीं
तुम्हें चाहा, इजहार किया
पर किसी से की सिफारिश तो नहीं
अक्सर मन होता है, गुजरूँ उन गलियों से फिर
कहीं मायूस दिल की कोई गुजारिश तो नहीं
ये वादियाँ, ये हवाएं
इठलाती फूलों की पंखुडियां
उछलती नन्हीं गौरैया
मस्ती में धुन, घुमती बेखौफ़
प्रणम्य गिलहरियाँ
और सहज इन्हें निहारता
अंतर्मन से तुम्हें पुकारता
मैं और मेरा मन
अच्छा सुनो...
ये तो बताओ
इन सब के पीछे बारिश तो नहीं! 
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