हल षष्ठी की शुभकामनाएं by Tarun Kumar Soni

हल षष्ठी की शुभकामनाएं 


नव पल, नयी शुरुआत है 
हर दिन, नयी सौगात है

आखिर क्यों दिलों में वेदना है 
प्रतिक्षण दिग्भ्रमित होती चेतना है

गलतियां होती ही है, आखिर स्वीकाने को 
न की खुद को धिक्कारने को

न कोई यहाँ 'सर्वस्व' है 
वक़्त पे न किसी का वर्चस्व है

स्वयं को कदापि न दुखी, दीन होने दो 
आखिर है ही क्या हमारे पास कुछ खोने को

पर, वक़्त नहीं है रोने को 
ग्लानी भाव में दिन भर सोने को

गर्व से गलती स्वीकार करें 
सत्य से तेज अपनी तलवार करें

वक़्त दें खुद को
न की नष्ट करें विविध को

रणभूमि में सदैव वार नहीं होता 
सदैव शक्तिप्रदर्शन का व्यापर नहीं होता

क्षणिक असफलताओं से न निराश हों 
अंतरात्मा की सुने, पुकार को

प्रति-क्षण जीवन में खुशियों की बौछार हो 
हल षष्ठी की शुभकामनाएं स्वीकार हो! 😊

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